जीवनसी भरी मुस्कान तेरी
रहती है पल पल साथ मेरे
तेरी यादमे खोये खोये
कटते है दिनरात मेरे
संगमरमरी रूप सुहाना
चेहरा खिलता हुआ गुलाब
कुंतल काले बादल जैसे
नयनन छलकातें है शराब
मंडराते भंवर से बीते
हफ्तेके दिन सात मेरे
तेरी यादमे खोये खोये
कटते है दिनरात मेरे
तेरी गलीमे, सुना लगा है
आशिक लोगोंका ताता
भयभित हूं होकर मेरा
जनमों का तुझसे नाता
पाया तुझको और किसीने
क्या होगे हालात मेरे?
तेरी यादमे खोये खोये
कटते है दिनरात मेरे
यूं तो खोनेका आदी हूं
तुझको खो ना पाउंगा मै
अगर सामने मौतभी आये
तुझे छोड क्यों जाउंगा मै?
बिन तेरे यह कौन भरेगा
ज़ख़मोंके आघात मेरे?
तेरी यादमे खोये खोये
कटते है दिनरात मेरे
निशिकांत देशपांडे मो.क्र.९८९०७ ९९०२३
E Mail--nishides1944@yahoo.com