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Tuesday, December 25, 2012

स्वागतम नव वर्ष का


फासला मिटता रहे
कारवाँ बढता रहे
मंज़िलों की हर सिढी
हर कोई चढता रहे

हवा मे है ताज़गी
और क्षितिज पर लालिंमा
नज़र न आये कंही
निशा तेरी कालिमा
पर लगा कर पंछियोंके
हर कोई उड़ता रहे
मंज़िलों की हर सिढी
हर कोई चढता रहे

दिलमे हो झंकार हरदम
गीत और संगीत का
हर कोई खुल कर करें
ज़िक्र अपने मीत का
एकही हो तार दिलमे
दिलरुबा छिडता रहे
मंज़िलों की हर सिढी
हर कोई चढता रहे

साल मे नव हर जगह
उजाले मिल जायेंगे
याद कर गुज़रे दिनों के
अंधेरे क्या पायेंगे?
मिल गये फिर भी अंधेरे
हर कोई लड़ता रहे
मंज़िलों की हर सिढी
हर कोई चढता रहे

स्वागतम नव वर्ष का
खोल कर बाहें करें
बीज बोने नफ़रतों का
काम हम काहें करें?
चंद अक्षर प्यार के
हर कोई पढता रहे
मंज़िलों की हर सिढी
हर कोई चढता रहे


निशिकांत देशपांडे मो.क्र. ९८९०७ ९९०२३
E Mail-- nishides1944@yahoo.com