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Wednesday, February 13, 2013

मैने देखा जहर नही


याद तुम्हारी आयी ना हो
ऐसा कोई प्रहर नही
तनहाई से भी जहरीला
मैने देखा जहर नही

संग आपके मखमल जैसा
जीवन मानो सपना था
चाँद सितारों की बस्ती थी
बसंत भी तो अपना था
तुम जाने के बाद गाँव मे
मुडकर आयी सहर नही
तनहाई से भी जहरीला
मैने देखा जहर नही

भूल गया हूं अतीत सारा
खुदसे मै रूबरू नही
तेरेबिन दुखियारे मन को
चैन नही जुस्तजू नही
चप्पा चप्पा तुम्हे न ढूंडा
ऐसा कोई शहर नही
तनहाई से भी जहरीला
मैने देखा जहर नही

टूट गये रिश्ते शबनम से
सबा न हो महसूस कंही
दिये बुझे है इस बस्ती मे
तूफाँ है, फानूस नही
मंज़िल कैसे खोजेंगे हम?
कुछभी आता नजर नही
तनहाई से भी जहरीला
मैने देखा जहर नही

शाम पुरानी कहाँ गयी वो?
सूनी अब है बज़्म यहाँ
तबियत महफिल की है बदली
कौन सुनेगा नज़्म यहाँ
कागज़ पे मै बयाँ करू क्या?
लिखता मै अब बहर नही
तनहाई से भी जहरीला
मैने देखा जहर नही

खुश्क इलाका बेरहमोंका
असवन की है सिर्फ नमी
बोझ बनी है एक जिंदगी
साँसों की भी यहाँ कमी
डूब मरू कैसे या रब ?
आसपास मे नहर नही
तनहाई से भी जहरीला
मैने देखा जहर नही


रचना मे आये उर्दू शब्दों के अर्थः-- १) सहर-- Morning. २) रूबरू-- face to face, in front of ३)जुस्तजू--search ४) सबा-- morning easterly breeze ५)फानूस--glass shade for candle ६)बज़्म--maifil ७) नज़्म--A form of poetry ८) बहर-- meter of poetry ९) बेरहम--cruel १०) या रब  Oh God !


निशिकांत देशपांडे मो.क्र. ९८९०७ ९९०२३
E Mail-- nishides1944@yahoo.com