आसुओंसे है गुजारिश
आँखोंसे अब बहना नही
इत्तफाकन मिल गये तो
शिकवे गिले कहना नही
जुस्तजू ना खत्म होगी
जिंदगी चलती रही
मोडपर हर जिंदगीके
मायुसी मिलती रही
ग़म का सेहरा सर पे अपने
और कोई गहना नही
इत्तफाकन मिल गये तो
शिकवे गिले कहना नही
जिंदगी की एक ख़्वाइश
वो हमेशा खुश रहे
दर्द से रिश्ता हमारा
सहते रहे बिन उफ कहे
बहारों उनसे मिलो तुम
मेरी गली रहना नही
इत्तफाकन मिल गये तो
शिकवे गिले कहना नही
गुजरती है शाम अपनी
मय, नशा और आह पर
लडखडाते कदम मेरे
बेहोष तेरी राह पर
दिल खुला, अछियोंका
बुरखा कभी पहना नही
इत्तफाकन मिल गये तो
शिकवे गिले कहना नही
तीसरा मै कह चुका हूं
तलाक आइना देख कर
खुद से अज़ादी कहाँ?
जिंदा हुं यादें रोक कर
आरजू है अल्विदा लूं
बस और कुछ सहना नही
इत्तफाकन मिल गये तो
शिकवे गिले कहना नही
निशिकांत देशपांडे मो.क्र. ९८९०७ ९९०२३
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